
साधना क्या है?
मनुष्य मूलतः एक स्मृति-तंत्र है। यही स्मृतियाँ तय करती हैं कि कोई व्यक्ति बाहरी दुनिया के साथ किस प्रकार संपर्क करता है। यौन व्यवहार से लेकर जीवित रहने तक—हर चीज़ वर्षों से अर्जित ज्ञान और अनुभवों पर आधारित होती है। इन स्मृतियों की बाध्यकारी प्रकृति, जो हमें दुनिया को केवल सीमित दृष्टि से देखने पर मजबूर करती है, उससे ऊपर उठना ही साधना है।

शिव साधना के लाभ
भावनात्मक स्थिरता
अधिकांश लोग बाहर की परिस्थितियों से हिल जाते हैं।
थोड़ी प्रशंसा — तो उत्साह।
थोड़ी आलोचना — तो गिरावट।
थोड़ा नुकसान — तो भय।
शिव भक्ति साधना आपको प्रतिक्रिया से प्रतिक्रिया-रहितता की ओर ले जाती है।
7 दिनों में आप सीखेंगे:
-
भावनाओं को दबाना नहीं, देखना
-
भय से भागना नहीं, स्वीकारना
-
परिस्थितियों को नियंत्रित करना नहीं, समर्पित होना
परिणाम: आपका मन धीरे-धीरे स्थिर, संतुलित और शांत होने लगता है।
अहंकार की शिथिलता
अहंकार केवल घमंड नहीं है।
अहंकार है — “मैं” की पकड़।
-
मेरी पहचान
-
मेरी छवि
-
मेरी अपेक्षाएँ
-
मेरा नियंत्रण
जब जीवन वैसा नहीं चलता जैसा आप चाहते हैं, पीड़ा जन्म लेती है।
इस साधना में:
-
मंत्र जप के माध्यम से “मैं” का विसर्जन
-
ध्यान के माध्यम से पहचान से दूरी
-
चिंतन के माध्यम से आत्म-जांच
परिणाम: आप हल्के होते हैं।
प्रतिक्रियाएँ कम होती हैं।
जीवन के साथ संघर्ष कम होता है।
आंतरिक मौन और साक्षी भाव
शिव केवल एक देवता नहीं —
शिव शुद्ध साक्षी चेतना का प्रतीक हैं।
इस साधना के माध्यम से आप अनुभव करना शुरू करते हैं:
-
विचारों को आते-जाते देखना
-
भावनाओं से परे एक शांत केंद्र
-
भीतर एक मौन उपस्थिति
यह मौन भागने का नहीं है।
यह शक्ति का स्रोत है।
परिणाम:
निर्णय स्पष्ट होते हैं।
मन कम उलझता है।
भीतर एक गहरी स्थिरता स्थापित होती है।




